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Music

मास्टरिंग में ऑटोमेशन: वॉल्यूम और उससे अधिक

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Difficulty:IntermediateLength:ShortLanguages:

Hindi (हिंदी) translation by Dee.P.Tree (you can also view the original English article)

इस ट्यूटोरियल में मैं आपको दिखाऊंगा कि mastering-मास्टरिंग के दौरान कई automation-ऑटोमेशन-स्वचालन की तरकीबों को लागु करके पुरे किए हुए mix-मिक्स-संयोजित ध्वनियों को कैसे और बेहतर बनाया जा सकता है।

मैं तरकीबों की संभवित खूबियां या नुकसान को परखूंगा और देखूंगा कि क्यों आप एक तरकीब को छोड़कर दूसरी तरकीब को प्रयोग में लाना चाह सकते है।

संगीत के दौरान कोई parameter-पैरामीटर-प्राचल, जैसे कि कोई fader-फेडर-प्राचल को कम-ज्यादा करनेवाले दस्ते, की गतिविधि को ऑटोमेशन के नाम से जाना जाता है। यह गतिविधियां प्रोग्राम (पहले से तैयार-पूर्वायोजित) या परफॉर्म (निष्पादित-जीवंत समय में तैयार) की जा सकती हैं। Workstation-वर्कस्टेशन के पास इन गतिविधियों को playback-प्लेबैक-चालन के दौरान फिरसे दोहराने की क्षमता है।

Volume-वॉल्यूम को ऑटोमेट करना - ध्वनि की मात्रा को स्वचालित करना

एक संपूर्ण मिक्स में वोल्युम बदलने की क्रिया गाने को ज्यादा ऊर्जावान और जोशीला बना देती है। यह बदलाव धीरे-धीरे या अचानक हो सकते है। अचानक से किया हुआ बढ़ावा एक chorus-कोरस-वृंदगान को (ऊर्जा के संदर्भ में) उठा सकता है जबकि धीरे-धीरे किया हुआ बदलाव एक build up-बिल्ड अप-(ऊर्जा के सन्दर्भ में) चढाव को और घनिष्ठ बना सकता है।

मेरे वॉल्यूम को ऑटोमेट करने की क्रिया को देखने से पहले, आप उसको कैसे नाप सकते है वह समझना जरूरी है। नीचे दिए गए दो तरीकों से उसको गिना जाता हैं—peak-पिक-उच्चतम  और RMS-आरएमएस

  • Peak Volume-पीक वॉल्यूम: माप अधिकतम सीमा (०.०dB) से कितना दूर या ऊपर है
  • RMS-आरएमएस: कोई समय की अवधि के दौरान औसत वॉल्यूम

सामान्यतः दिमाग, संगीत कितना loud-लाउड-ऊँची आवाज का है वह समझने के लिए, आरएमएस, या root mean square-रुट मीन स्क्वायर, मूल्य का उपयोग करता है। औसत वॉल्यूम,  threshold/gain-थ्रेशोल्ड/गैन-सीमा/बढ़त के नाम से जाने जाते एक पैरामीटर से नियंत्रित किया जा सकता है, जो पैरामीटर एक limiter-लिमिटर-ध्वनि के सिग्नल को पूर्वनिश्चित मूल्य से ऊपर न जाने देनेवाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के लिए आम है।

आरएमएस मूल्य को बढाने की क्रिया उसको ज्यादा ऊँची आवाजवाला हो ऐसा-लाऊडर सुनाई देगा लेकिन dynamic range-डायनामिक रेंज-गीत की सबसे बड़ी और छोटी मात्रा की आवाज़ का अनुपात और कम हो जाने की कीमत पर।

संगीत की कृति के कोरस के हिस्सों को (ऊर्जा के संबंध में) उठाने के लिए, verses-वर्सेज-पद्यों से कोरस को थोड़ा ज्यादा ऊँची आवाज का-लाऊडर बनाकर प्रयत्न करें। जैसे पिछले अनुच्छेद में चर्चा की, बहुत ज्यादा डायनामिक न गवांने के लिए सूक्ष्म परिवर्तन करें। ज्यादातर, मैं थ्रेशोल्ड को १ dB से १.५ dB से अधिक ऑटोमेट नहीं करता हूँ।

Bridge section-ब्रिज सेक्शन-गाने का सेतु विभाग कई बार विपरीत रूप में अच्छी तरह काम करता है, जिसमे थ्रेशोल्ड को उतना कम करना है कि कोई पीक रिडक्शन-घटौती न हो रही हो। यह कोरस हिस्से को और भी बड़ा होने की अनुभूति देने में फलित होता है।

पीक वॉल्यूम को ऑटोमेट करना - ध्वनि की उच्चतम मात्रा को स्वचालित करना

Fades-फेड्स-धीमे से बढ़ती या कम होती ध्वनि के लिए पीक वॉल्यूम को अक्सर उपयोग में लिया जाता है। आप फेडर से पीक वॉल्यूम को ऑटोमेट कर सकते है।

फेड्स के लिए, लिमिटर को फेडर से पहले रखना पड़ता है। अगर आप फेड कर रहे है तो आपको लिमिटर को नियंत्रित करना पड़ता है, बजाय कि फेडर लिमिटर के ऊपर होती हुई उसकी असर को नियंत्रित करे।

उदहारण के लिए, यदि लिमिटर फेडर के बाद होता, और आपने फेडर से वॉल्यूम को कम किया, तो वॉल्यूम की मात्रा जो लिमिटर में जा रही है वह कम होगी।

लिमिटर एक ऐसे स्थान पर आएगा की जहा पे वह सिग्नल की मात्रा को कम नहीं कर रहा, क्योकि अब उसको कम करने के लिए पीक्स ही नहीं मिल रही। यह fade out-फेड आउट-आवाज धीमे से कम हो रही हो ऐसे हिस्से में कम सुसंगत डायनामिक रेंज में परिणामित होता है।

Stereo Width-स्टीरियो विड्थ का ऑटोमेशन - त्रिविमेक्ष चौड़ाई का स्वचालन

एक गीत की स्टीरियो विड्थ को ऑटोमेट करने की क्रिया एक विभाग को और भव्य-एपिक महसूस करवाती है। हालांकि, मास्टरिंग के दौरान बहुत ज्यादा स्टीरियो वाइडनिंग phasing-फेसिंग में फलित होता है, जो ध्वनि को ज्यादा पतला बनाता है।

वर्स के लिए sides-साइड्स को कम करते हुए (तस्वीर १) और कोरस के लिए उसको बढ़ावा देते हुए (तस्वीर २), स्टीरियो विड्थ को ऑटोमेट करने का प्रयास करें। यह बढ़ी हुई चौड़ाई-विड्थ की अनुभूति देगा जो फेसिंग होने के भय को कम करता है।

सामान्य नियम के तौर पर मैं साइड्स को ०.५dB से ज्यादा बढ़ावा नहीं देता। अन्य सुझाव यह है कि ऐसा टूल-उपकरण का प्रयोग करें जो आपको एक band-बैंड की स्टीरियो विड्थ पर नियंत्रण दे, न कि पूरी frequency range-फ्रीक्वेंसी रेंज-आवृत्ति श्रेणी पर। यह एक मास्टर को ज्यादा स्थायी बनाए रखने में मदद करेगा।

Verse 05db cut in the high mids
वर्स: ०.५dB की कटौती हाई मिड्स-ऊपरी मध्य आवृत्ति की श्रेणी में
Chorus 05db boost in the high mids
कोरस: ०.५dB की बढ़ौती हाई मिड्स-ऊपरी मध्य आवृत्ति की श्रेणी में

Compressor-कंप्रेसर को ऑटोमेट करना - संपीडक को स्वचालित करना

मास्टरिंग में कंप्रेसर को ऑटोमेट करना आम नहीं है, विशेष रूप से attack time-अटैक टाइम-अटैक समय, जो मास्टर में विविधता और सक्रियता लाने में मदद करता है।

कोरस के लिए धीमा अटैक समय में बदलाव करने की प्रक्रिया कई बार वह भाग को ज्यादा आगे आया हुआ-अपफ्रंट लगे वैसा बनाने में अच्छे से काम आती है, जो ज्यादा त्रि-परिमाणिय मास्टर बनाता है।

Noise Restoration-नॉइज़ रिस्टोरेशन में ऑटोमेशन - शोर बहाली में स्वचालन

Audio-ऑडियो-श्रव्य में से हिस्स-सुसकार, क्रेकल-करकराहट और हम्-भिनभिनाहट जैसी क्षतियाँ दूर करने की प्रक्रिया को Restoration-रिस्टोरेशन कहते है। कई बार मास्टरिंग चालू करने से पहले क्षतियाँ दूर करना बेहतर है, जिससे उसके ऊपर काम चालू करने के लिए एक अच्छा आरंभ बिंदु बन जाता है।

नॉइज़, जो शांत भागों में सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष होता है वह, ख़राब signal to noise ratio-सिग्नल टू नॉइज़ रेशियो-सिग्नल से नॉइज़ का अनुपात का परिणाम है, जैसे कि ऑडियो की शुरूआत और अंत।

रिस्टोरेशन tools-टूल्स-संसाधनों की परेशानी यह हैं कि वे सिर्फ नॉइज़ पर ही केंद्रित हो उतने समझदार नहीं हैं, जो कई बार संगीत के (ध्वनियों के संदर्भ में) व्यस्त हिस्सों में से fundamental frequency-फंडामेंटल फ्रीक्वेंसी-मूल आवृत्ति को दूर कर देते हैं।

यह ध्यान में रखते हुए, रिस्टोरेशन प्लग-इन को कम आवाजें हो वैसे हिस्सों में ही लागू करना ऑडियो की गुणवत्ता पुरे के पूरे संगीत में बरक़रार रखने के हेतु एक बेहतर विकल्प हो सकता है—क्योंकि नॉइज़ तभी तकलीफ है जब आप उसको सुन सकते है।

De-Esser को ऑटोमेट करना - डी-एसर स्वचालित करना

एक de-esser-डी-एसर का मुख्य काम गायक या गायिका की आवाज़ में से सिसकारी, शब्द के भाग जैसे कि S और T से चालू होते हुए शब्दों की कठोरता, जो ज्यादातर ऊपरी-मध्य आवृत्ति की श्रेणी में होता है, उनको कम करना है। डी-एसर, हालांकि, कठोर S या T और, उदाहरण के लिए, कठोर Hi-Hat-हाई-हैट, के बीच में अंतर समझ नहीं सकता।

फिरसे, जब सिसकारी सुनाई देती है तभी प्लग-इन को काम पे लगाना ऑडियो की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक बनेगा।

Reverb को ऑटोमेट करना - रिवर्ब को स्वचालित करना

मास्टरिंग में reverb-रिवर्ब एक रचनात्मक प्रक्रिया के बजाय सुधारात्मक प्रक्रिया के तौर पर अक्सर प्रयोग में आता है।

ऐसे अवसर आ जाते है जब एक मास्टरिंग इंजीनयर को ऐसा ट्रैक-गीत मिल जाता है जिसमे उसका अंत भाग बनानेवाले को ठीक लगा हो उस तरीके से-सब्जेक्टिवली बहुत छोटा रख के कटा हुआ हो। यहाँ पे ऑटोमेटेड रिवर्ब काम आता है।

रिवर्ब को फेड के साथ समय में dry-ड्राई-इफ़ेक्ट के बगैर से wet-वेट-इफ़ेक्ट के साथ तक ऑटोमेट करने की क्रिया फेड को सहज या लंबा करने में मददरूप होता है, जो ज्यादा पेशेवर मास्टर देता है।

समापन

इस ट्यूटोरियल में मैंने देखा कि लाउडनेस-आवाज की ऊंचाई, विड्थ-चौड़ाई और डेप्थ-गहराई को ऑटोमेट-स्वचालित करना ज्यादा रोमांचक, भव्य और त्रि-परिमाणिय मास्टर तैयार करने में सहायक बनता है।

साथ ही में, सुधारात्मक ऑटोमेशन को शामिल किया जबकि ऑडियो की वह गुणवत्ता को बरक़रार करने में मददगार भी हुआ।

चर्चा की हुई सभी या कुछ तरकीबें एक मास्टर पे लागु की जा सकती है।

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